Sunday, January 17, 2016

दो महापुरुषों की संक्षिप्त कथा

संत (?) आसाराम के पसंदीदा शगलों में से एक था श्री कृष्ण के भेष में मंच पर विचरना। वयोवृद्ध संत ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कृष्ण की तरह कारागार भी उनकी इहलीला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। कृष्ण का जन्म कोठरी में हुआ और आसाराम जीवन की संध्याकाल कोठरी में काट रहे हैं। दो साल से ऊपर जेल में बीत चुके हैं लेकिन कोई चमत्कार, कोई जंतर बाबा के काम नहीं आ रहा। आसाराम को उम्मीद की रोशनी तब दिखाई दी जब संत को स्वामी (सुब्रहमण्यम) का साथ मिला। लेकिन सोनिया और राहुल गांधी को ज़मानत के लिए कोर्ट के सामने हाज़िर करा पाने में कामयाब स्वामी संत की ज़मानत नहीं करा सके। 



















लेकिन आज आसाराम की बात क्यों ?


वजह है दिल्ली इंटरनेशनल बुक फेयर- 2016। मेला तो किताबों का था लेकिन यहां गुरुओं से जुड़े इतने स्टॉल पहले नहीं दिखे। इनमें सबसे रोचक स्टॉल था आसाराम और दक्षिण के आसाराम यानि स्वामी नित्यानंद का। आसाराम के स्टॉल पर भक्तिनों का जमावड़ा है, वो आते जाते लोगों को आसाराम के संदेश की कॉपी बांट रही हैं। बगल में रखे एलईडी टीवी पर अर्णब गोस्वामी का शो चल रहा है। अर्णब, आसाराम की जेल पर डिबेट कर रहे हैं और कोई एक ही बाईट लगातार लूप में चल रही है। 





आसाराम के स्टॉल से कुछ मीटर की दूरी पर ही स्वामी नित्यानंद की दुकान लगी है। हालांकि 38 साल के नित्यानंद का अनुभव (जेल का) आसाराम से कम रहा है। लेकिन, एक मामले में दोनों बदकिस्मत रहे हैं स्कूल में दोनों का प्रदर्शन न मालूम कैसा रहा लेकिन दोनों ने ऐसा टेस्ट (Potency test) पास कर लिया जिसने उन्हें जेल तक पहुंचा दिया।  असल दुनिया में भले ही दोनों संत (?) हज़ारों किलोमीटर के फासले पर हों, बुक फेयर में दोनों एक ही छत के नीचे हैं।
नित्यानंद के आगे अभी लंबा जीवन पड़ा है, वो भविष्य में सतर्क रहेंगे। लेकिन आसाराम उम्र के इस दौर में जेल में पहुंचे हैं....अंत बुरा तो सब बुरा......!

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